Part–2 : ध्यान का अभ्यास
Ajahn Chah
4. शोर करता मन
एक शिष्य बोला, “ध्यान में मेरा मन बहुत शोर करता है।” Ajahn Chah मुस्कराए और बोले— “जंगल में पक्षी गाते हैं, क्या तुम उनसे चुप रहने को कहते हो?”
सीख: मन को चुप नहीं कराना है, उसे देखना और सुनना सीखना है।
5. मच्छर और करुणा
मच्छरों से परेशान होकर शिष्य बोला, “ये ध्यान भंग कर देते हैं।” Ajahn Chah बोले— “अगर करुणा ध्यान को तोड़ दे, तो वह ध्यान कैसा?”
सीख: सच्चा ध्यान करुणा से अलग नहीं होता।
6. चलते-फिरते ध्यान
उन्होंने कहा— “चलते समय जानो कि चल रहे हो, बोलते समय जानो कि बोल रहे हो।”
सीख: ध्यान कोई अलग क्रिया नहीं, जागरूक जीवन ही ध्यान है।
🕊️ © drprabhattandon
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